अजवाइन और सेहत: ओवा आणि स्वास्थ

  
  1. RAM KASTURE

    RAM KASTURE Member

    अजवाइन और सेहत ओवा आणि स्वास्थ
    अजवायींन देश के हर घर में पायी जाती है, इसके सरसों से छोटे बारीक़ दाने होते जिसका रंग मटमैला होता है. इसको भी खेती से प्राप्त किया जाता है. यह दानो के, तेल, पाउडर और अर्क के रूप में मिलता है. इसे पानी में डालकर गर्म करने से यह घोल के रूप में भी प्राप्त होता. इसके पत्ते भी मिलते है. आयुर्वेद में इसको अनेक रोगों के लिए लाभ दायक बताया गया है. इसके नियमित सेवन से बिना डाक्टर के पास जाए अपने रोगों का इलाज किया जा सकता है. इसको लेने से कोई विपरीत परिणाम शरीर पर नहीं होता है. यह ऐसी वस्तु है जिसे बूढ़े, बच्चे और जवान भी प्रयोग में ला सकते है. यह अद्भुत है अनेको बीमारियों का इलाज इसमें समाहित है. इसके गुणों को विस्तार से नीचे बताया गया है:

    पेट के कीड़े होने पर : छोटे बच्चे मीठा जादा पसंद करते है इस कारण उनके पेट में कीड़े होने की संभावना रहती है, कीड़ो के होने से बच्चा अनमना सा और परेशान रहता है, पेट में दर्द होता है, इस दशा में प्रभावित बच्चे को अजवाइन का लगभग आधा ग्राम चूर्ण में इसी मात्रा के बराबर मा कालानमक मिलाकर सोते समय गर्म पानी से बच्चों को देने उनको इस बीमारी में लाभ मिलता है क्योकि प्रभावित बच्चों के पेट के कीड़े मर जाते हैं

    2. गठिया वात या जोड़ों का दर्द : आजकल यह रोग अनेक लोगो अपनी चपेट में ले रहा है, महिलाये इस रोग से जादा परेशान है. इसमें दर्द के हलचल करने में कठिनाई होती है. जिस जोड़ पर दर्द है उस जोड़ को अजवायीन के तेल से मालिश करने पर या अजवायींन को लेकर उसे एक कपडे में बांधकर उसकी पोटली को तवे पर गरम कर पीड़ित स्थान पर सिकाई करने से गठिया या जोड़ो के दर्द में आराम मिलता है.

    3. मिट्टी या कोयला खाने की आदत : बच्चो या किसी व्यक्ति को मिट्टी या कोयला खाने की आदत है तब ऐसे व्यक्ति या बच्चे को एक चम्मच अजवाइन का चूर्ण रात में सोते समय प्रतिदिन देने 21 दिन देने से यह आदत छुट सकती है.

    4. पेट दर्द में यह आराम देती है : उट पटांग कोई वस्तु खाने से या ऐसी वस्तु खाने से पेट में दर्द हो जाता है यह एक आम बात है. ऐसा दर्द होने पर 1 ग्राम काले नमक और 2 ग्राम अजवायींन का चूर्ण गर्म पानी के साथ लेने से पेट के दर्द में आराम होता है.

    5. महिलाओ से सबंधित रोगों में : जिसने बच्चे को जन्म दिया है ऐसी महिला के कमर में दर्द, भूख नहीं लगने की अक्सर शिकायत रहती है. यदि प्रसूता को को 1 चम्मच अजवाइन और 2 चम्मच गुड़ मिलाकर दिन में 3 बार खिलाया जाए तब कमर का दर्द में आराम मिलता है भूख भी लगती है साथ गर्भाशय को अजवायीन शुध्द भी करता है. मासिक धर्म सबंधी शिकायते इसी प्रयोग से दूर हो जाती है. महिलाओ के रोगों के इसे गुणकारी बताया गया है.

    6.अनेक प्रकार की खांसी: मौसम बदलने या किसी वस्तु से एलरजी होने पर सर्दी खासी होना एक आम समस्या है, सर्दी तो एक या दो दिनों में ठीक होजाती है किन्तु खासी से निजात कई दिनों बाद मिलती है. इस हेतु एक चम्मच अजवाइन को अच्छी तरह चबाकर गर्म पानी का पीने से फायदा होता है. अजवाइन के रस में एक चुटकी कालानमक मिलाकर इसको लेने से भी खांसी में आराम मिलता है. इसे खाने के बाद ऊपर से गर्म पानी पीना चाहिए. निश्चित आराम मिलता है.

    7. बिस्तर में पेशाब करना : अनेक बच्चो को बिस्तर में पेशाब करने की आदत से अभिभावक परेशान रहते है, साथ ही घर में आये मेहमान के सामने क्या कहू की स्थिति भी बनती है. इस आदत को नियंत्रित नहीं किया गया तब यह स्थिति युवा अवस्था तक रहती है. इस आदत से मुक्ति पाने के लिए सोने से पूर्व 1 ग्राम अजवायीन का चूर्ण सोने से पहले खिलाया जाता है. चूर्ण खिलाने की क्रिया नियमित और तब तक करनी चाहिए जब तक बच्चा बिस्तर में पेशाब करना बंद न कर दे.

    8. बार-बार पेशाब का आना : अनेक लोगो को बार बार पेशाब करने के लिए जाना पड़ता है. इससे छुटकारा पाने के लिए अजवाइन और तिल मिलाकर खाने से बहुमूत्र की समस्या दूर हो जाती है.

    9. मुंहासे : वाहनों के धुएं प्रदुषण और अन्य कारणों से मुंहासे होने की समस्या होती है, इसके लिए आजकल बाजार में अनेक प्रकार की क्रीम उपलब्ध है, किन्तु इन क्रीमो से साईट इफेक्ट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. इस संभावना से बचने के लिए 2 चम्मच अजवाइन को 4 चम्मच दही में पीसकर रात में सोते समय पूरे चेहरे पर मालिश करे और सुबह उठकर गर्म पानी से मुंह को धो लें. नियमित यह प्रयोग किये जाने से यह समस्या दूर हो सकती है.

    10. दांत दर्द : अनेक लोग दांत में दर्द की शिकायत होने पर डेंटिस्ट के पास जाते है, डेंटिस्ट दांत निकालने की सलाह देता है. इससे बचने के लिए दांत पर अजवाइन का तेल लगाएं. एक घंटे बाद गर्म पानी में एक एक चम्मच पिसी अजवाइन और नमक के घोल से कुल्ला करने से दर्द में कमी होती है.

    11. अजीर्ण: बासा भोजन, अधिक भोजन, तली हुयी चीजे खाने से यदा कदा अजीर्ण की शिकायत हो जाती है. प्रतिदिन भोजन के बाद नियमित रूप से एक चम्मच सिकी हुई अजवायीन के साथ सेंधानमक का प्रयोग करने से यह समस्या दूर हो सकती है.

    2. जूं : बालो में जूं होने पर एक चम्मच फिटकिरी और दो चम्मच अजवाइन को पीसकर इसके मिश्रण को एक कप छाछ में मिलाकर बालों की जड़ों में सोते समय लगाएं और सुबह सर को धोले इस प्रयोग से सिर में होने वाली जूं मरकर पानी के साथ बाहर निकल जाती हैं.

    13. महिलाओ का बांझपन : अनेक महिलाओ गर्भ धारण नहीं कर पाती इसे बांझपन कहा जाता है. ऐसी महिलाओ को मासिक-धर्म के आठवें दिन से पचीस ग्राम अजवायीन और पचीस ग्राम मिश्री को एक सौ पचीस ग्राम पानी के रात्री में मिटटी के बर्तन में रख दे. तथा सुबह के समय इस मिश्रण को पीस कर पिये इस प्रयोग को करते समय तक भोजन में मूंग की दाल और बिना नमक रोटी का भोजन करे. इस प्रयोग से गर्भ धारण होगा.

    14. अजवायीन मच्छर का दुश्मन है : आज कल मछरो से बचाव के अनेको साधन है, किन्तु इन साधनों को शरीर पर नकारात्मक प्रभाव पड सकता है. अजवाइन पीसकर उसकी मात्रा के बराबर मात्रा में सरसों के तेल में मिलाकर मिश्रण बना ले इस मिश्रण को खडे के टुकडो पर लेप कर दे और इन टुकडो को कमरे के चारो कोनो पर लटका दे. इससे मछर का प्रकोप नहीं सहना पड़ेगा.

    15. पाचक चूर्ण : अनियमित भोजन, चिंता आदि के कारण किया गया भोजन पूरी तरह से पच नहीं पाता पाचन तंत्र को व्यवस्थित बनाने के लिए अजवाइन और हरड़ को बराबर मात्रा में लेकर इसका चूर्ण बना ले इस चूर्ण में स्वादानुसार हींग और सेंधानमक मिलाकर अच्छी तरह से पीसकर सुरक्षित रख लें. इस चूर्ण को भोजन उपरांत एक :एक चम्मच गर्म पानी से लेंने पाचन क्रिया ठीक होती है.

    16. सिर में दर्द होने पर : सरदर्द की शिकायत होने पर अजवाइन के पत्तों को पीसकर इसका लेप सिर पर लगाने से सिर का दर्द की शिकायत दूर हो जाती है.

    17. कान दर्द : कान में दर्द होने पर दस ग्राम अजवाइन को पचास मिलीलीटर तिल के तेल में उतना पकाये जो सहन करने योग्य हो . इस सहने योग्य गर्म तेल को दो –दो बूंद कान में डालने से कान के दर्द से छुटकारा मिल जाता है.

    18. सर्दी-जुकाम होने पर : सर्दी जुकाम होना आम बात है इसके लिए दस ग्राम पुदीने का चूर्ण , दस ग्राम अजवाइन, दस ग्राम देशी कपूर को एक साफ शीशी में डालकर अच्छी प्रकार से बंद कर धूप में रखें. थोड़ी देर में तीनों चीज गल जाएंगी और एक मिश्रण मिलेगा. इसकी तीन –चार बूंद रूमाल में डालकर नाक से सूंघने से या आठ –दस बूंद गर्म पानी में डालकर भाप लेने से शीघ्र लाभ होता है.

    19. बवासीर (अर्श) - देशी अजवाइन, जंगली अजवाइन और खुरासानी अजवाइन को बराबर मात्रा में लेकर महीन पीस लें और मक्खन में मिलाकर मिश्रण बना ले इस मिश्रण को बवासीर के मस्सों पर लगाने से कुछ ही दिन में मस्से सुख जाते है और रोगी को इस रोग से मुक्ति मिल जाती है.

    २०. गुर्दे का दर्द - तीन ग्राम अजवाइन का चूर्ण सुबह-शाम नियमित गर्म दूध के साथ लेने से गुर्दे के दर्द में फायदा होता है.

    21. पित्ती उछलना : पित होने पर दस ग्राम अजवाइन को पचास ग्राम गुड़ के साथ अच्छी प्रकार कूटकर पांच छह ग्राम की गोली बनाना चाहिए सुबह शाम एक –एक गोली ताजे पानी के साथ लेने से एक सप्ताह में ही तमाम शरीर पर फैली हुई पित दूर हो जाता है.

    ओवा एक एक उत्तम ओषधी
    अजवायीन ला मराठी मधे ओवा म्हणतात. ओवा एक मसाल्या चा पदार्थ असून एक उत्तम ओषधी पण आहे, आयुर्वेद मधे याला विशेष महत्व दिले गेले आहे. हे पदार्थ बहु उपयोगी असून स्वस्त आहे. कोणी ही व्यक्ति ओषधी म्हणुन याचा सहज उपयोग करू शकतो. ह्याचे ओषधी म्हणुन खालील प्रमाणे उपयोग केला जातो :
    1.पोटा मध्ये कीड़े झाल्यास: लहान मुलाना हा त्रास जास्त होतो हा त्रास झाल्यास अर्धा ग्राम ओवा व् अर्धा ग्राम सेंधा मीठ घेवुन त्याचे मिश्रण झोपताना गर्म पाण्या मधे दिल्यास हा त्रास नाहीसा होतो कारण ह्या मिश्रनाने पोटात ले कीड़े मरते.

    2. गठिया वात किंवा जोड़ा मध्ये दुखने : ज्या स्थानी दुखने आहे तिथे ओवा च्या तेलाची मालिश किंवा एक ओव्या ची पोटली बनउन त्याला ताव्ये पर गरम करून शेक्ल्यानी हे दुखने कमी होईल.
    3. माती आणि कोळसा खान्या ची लत : ज्या लोंकाना हे लत आहे त्याना एक चमचा ओव्या ची पुढ एक चमचा रात्री झोपताना दिली तर 21 दिवसात ही लत नाहीशी होते.

    4. पोटा ची तक्रार : ज्या लोंकाना पोटा ची समस्या आहे त्याना पोटाचे दुखने झाल्यास 1 ग्राम सेंधा मीठ आणि 2 ग्राम ओव्या चे का चूर्ण गर्म पाण्या बरोबर दिल्यास ह्या दुखन्या पासून आराम मीळतो.

    5. बायकांचे रोग : प्रसूता ला 1 चम्मचा ओवा आणि 2 चम्मच गुळ चे मिश्रण दिवसातून 3 वेळ दिल्यास कमरे चे दुखने थांबते भूख पण लागते आणि गर्भाशय ला ओवा शुध्द पण करते

    6. अनेक प्रकार चा खोखला : एक चम्मचा ओव्या ला चांगले चाउन गर्म पानी पिल्यास खोखल्या चा त्रास कमी होतो. ओव्या च्या रसा मधे एक चुटकी सेंधा मीठ टाकुन रात्री पिल्यास त्या वर गर्म पाणी घेत्ल्यानी खोखल्या पासून आराम मिळतो.

    7. बिछोन्या वर लघवी करने : ह्या लता पासून मुक्ति साठी 1 ग्राम ओवा झोपन्या पूर्वी खाल्यास फायदा होतो.

    8. : ज्या लोंकाना घडी घडी लघवी चा त्रास आहे त्यानी ओवा आणि तिळ घेतल्या ह्या रोगावर लवकर फायदा होतो.

    9. दांत दर्द : अनेक लोकाना दांत दुखन्या च्या त्रास होतो ह्या साठी दातं वर ओव्या चे तेल लावावे.
    10. अजीर्ण: रोज जेवन्या नंतर एक चमचा भाजलेला ओवा आणि सेंधा मीठ ही समस्या दूर होते.

    12. जूआ : ज्यान च्या केसा मधे जुआ होतात त्यानी 2 चमचे फिटकोळी आणि दोन चम्मचे ओवा वाटुन हे मिश्रण केसा च्या जड़ा मधे लावावे आणि सकाळी उठून केस धुतल्यास जुआ मेलेल्या दिसेल.
    13. मुल न झालेल्या बायका : अश्या बायकानी पाळी च्या आठव्या दिवसी पासून 25 ग्राम ओवा 25 ग्राम गडी साखर आणि 125 ग्राम पाण्याला माती च्या भांड्यात ठेउन सकाळी ह्या मिश्रण ला घोळूण पिल्यास त्याना ह्या प्रयोगानी फायदा होतो. ह्या प्रयोग मधे जेवणात मूगा ची दाळ आणि बिना मीठा ची पोळी खाल्ली पाहिजे

    14. अजवायीन मच्छर का दुश्मन है : ओव्या ला वाटुन त्या मधे सरसों चे तेल मिळऊण ह्याची पेस्ट तैयार करूँ खरड्या वर लेप करूण खोली च्या चारी कोपर्यात लाव्ल्यानी डास येत नाही.

    15. पाचण चूर्ण : ओवा आणि हरड़ बरोबर मात्रा घेउन ह्याचे चूर्ण मधे स्वादानुसार हिंग आणि सेंधा मीठ मिळउन जेवण नंतर एक चमचा घेतल्यास पाचन तंत्र ठीक होते.

    16. डोके दुखी : डोके दुखन्याची वेळ आल्यास ओव्या चा पाणा चा लेप लावल्यास डोके दुखी थाम्बते

    17. कानाचे दुखने : कानाच्या दुःखन्यात पण ओवा काम करतो. ह्या साठी दहा ग्राम ओवा 50 मिलीमीटर तेला मधे तितके गर्म करावे जितके सहन होईल . हे तेल काना मधे दोन दोन बूंद टाकल्यास ह्या दुखन्या पासून सुटका मिळते.

    18. सर्दी-पडसा : सर्दी पड़सा झाल्यास दहा ग्राम पुदीना, 10 ग्राम ओवा आणि दहा ग्राम कापुर एका शिशीत भरून त्याला घट्ट झाकण लाऊन उन्हात ठेवल्यास काही वेळात हे द्रव्य होउन जाते. ह्या द्रव्य ची 3-4 बूंद रूमाला वर ठेउन ह्याचे नाकानी व्वास घेतल्यास सर्दी नाही सी होते किंवा ह्या द्रव्या ची 8-10 थेम्ब गर्म पाण्या टाकुन त्याची वाफ घ्यावी.

    19. बवासीर (अर्श) - देशी ओवा , जंगली ओवा आणि खुरासानी ओवा ची बरोबर मात्रा घेउन ह्याला मिक्सर मधे एकदम बारीक करूण त्या लोनी मिसळूण बवासीर च्या मस्या वर लावल्यास हे मसे वाळूण नाहिशे होतात.

    20. गुर्दे चे द्दुखने : तीन ग्राम ओव्या चे चूर्ण सकाळी- संध्याकाळी नियमित प्रमाणे गरम दुधा बरोबर घेतल्यास ह्या दुखन्यात फायदा होतो.

    21.पित्त उसळणे : पित्त झाल्यास दहा ग्राम ओवा आणि पचास ग्राम गुळा मधे चांगले कुटुण 5-6 गोळ्या बनवून घ्या, एक एक गोळी सकाळ संध्याकाळ घेतल्यास पित्त चे दुखने मिटते. ह्या गोळ्याना ताज्या पाण्या मधे घेणे आवश्यक आहे.
     
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